गुरुवार, 4 जून 2009

केसरिया बालम आओ नीं पधारो म्हारे देस
मेहमान को भगवान मान परोटने वाली थार रेगिस्तान की इस छोटीकाशी में संतोष का साम्राज्य है। जितना मिले उसे बांटकर खाने को भगवान् की भक्ति व अल्लाह की इबादत मानते हैं यंहा के लोग। ऐसा अल्हड़ जीवन जीने वाले जब अपने हक़ के लिए खड़े होते हैं तो वे फ़िर पाँव पीछे नहीं रखना चाहते। प्रदेश में आईआईटी, आईआईएम, केन्द्रीय विवि खुलने हैं और बीकानेर संभाग ने पहली बार इनमें से एक की इच्छा जताई है। वह भी इसलिए कि उसे शैक्षिक असंतुलन का भान हुआ है और उसका मानना है कि इन तीनों में से किसी एक को यंहा खोला जाए तो उसके सफल रहने की पूरी संभावना है।
आमतौर पर एकराय न बनाने वाले बीकानेर ने पहली बार उच्च शिक्षण संस्थान के लिए एकसाथ कदमताल करने का निर्णय किया है। राजशाही के ज़माने से यंहा के लोग शिक्षा-संस्कृति व कला को समर्पित रहे हैं मगर इन तीनों ही दृष्टि से राज ने बीकानेर को कमजोर रखा है। यंहा का राजनेता, व्यापारी, उद्यमी, बुद्धिजीवी, छात्र आदि पहली बार एक जाजम पर आया है क्योंकि उसे पता है इस बार चूक कर दी तो पीढियां माफ़ नहीं करेगी। बीकानेर की अस्मिता का सवाल है यह। राज के अपने नजरिये होते हैं, यह यंहा के लोग भी जानते हैं मगर राज के नकेल डालने का तरीका भी यंहा के लोगों को बखूबी आता है। बीकानेर संभाग इस बार इस मामले में एक छत के नीचे दिखाई दे रहा है। यदि संस्थान खुलता है तो व्यापारी अपनी तरफ़ से मदद देगा और यंहा का नागरिक बाहर से आने वालों के स्वागत में पलक-पांवड़े बिछाएगा। हक़ की केवल मांग नहीं हो रही बल्कि उसे सहेजने का संकल्प भी लिया जा रहा है। शहर ही नही पूरे संभाग की भावना को यदि इसबार नज़रंदाज़ किया गया तो नतीजे कुछ भी हो सकते हैं। राजनेता (चाहे वह किसी भी दल का हो) यदि इस बार चूके तो उसे सहन नहीं करेंगे यंहा के लोग। अभी तो शहर का भाव इस कबीर वाणी की तरह है- साईं इतना दीजिये जा में कुटुम समाय, मैं भी भूखा न रहूँ साधु न भूखा जाय। यदि इसे पहचाना नहीं गया तो, इग्नोर किया गया तो संभाग के लोग किसी भी तरफ़ करवट ले सकते हैं। राज को यंहा की जनभावना पहचान लेनी चाहिए नहीं तो आने वाला समय नए आयाम स्थापित कर सकता है।

2 टिप्‍पणियां:

  1. madhuji,
    bikaner ko uska hqa dilane ke liye bhaskar team ko eak sarwdaliy manch ke liye pahal karna chahiye.yah manch geai_rrajnitik hoga to sare janprtinidhi apne dalo ki seema me bandhe rahne ke bawjood is manch ke niche aa sakte hai,bhaskar ki bhoomika behad khash ho sakti hai...kirti rana

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  2. madhuji,
    page laagna ar aapne janranjan saaru ghani-ghani badhaai. aap janranjan mayad bhasha me likho to sone me suhaago husi. aap in par vichaar avas karola. aage aapsu ghanemaan araj hai ke sgnr sanakaran ri bhaant bkn. sanskaran me mayad bhasha ro ek paano chhapo to aapri badi mehar husi. aas hai ke aap begaa hi mayad bhasha me ek paano chhapan ri jugat bethaavolo. mayad bhasha ri in peed ne aap www.mayadrohelo.blogspot.com par dekh sako saa. vagat kaadh*r dekhan ri khechal karya saa. khama ghani saa. jai rajasthan, jai rajasthani. aapro, vinod saraswat. bikaner.

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